गुरुकुलम

भारतीय परंपरा की ऐसी अनगिनत पद्धतियां है,जो अब प्रायः विलुप्त होती जा रही है,उनमें से एक ऐसी पद्धति है, जिसे गुरुकुलम कहा जाता है।
इस पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए,गव्य सिद्ध आचार्य डॉ निरंजन भाई वर्मा जी ने एक सशक्त कदम उठाया है।

निरंजन भाई के के सानिध्य में पंच गव्य विस्तार गुरुकुलम "रोहतक केंद्र" (ग्राम मदीना), हरियाणा में, अप्रैल 2017 में पहला गुरुकुलम खोला गया।

इस गुरुकुलम में पंच गव्य चिकित्सा को प्रोत्साहन देने हेतु, इस गव्य प्रांगण में पढ़ने वाले व्यक्ति," गव्य सिद्ध" कहलाते हैं।

पंच गव्य विस्तार गुरुकुलम " रोहतक केंद्र" (ग्राम मदीना) उन सभी व्यक्तियों का अभिनंदन करता है, जो, "राजीव भाई दीक्षित" के आंदोलन में कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहते है।

इस गुरुकुलम में, सम्पूर्ण गौ विज्ञान सिखाया जाता है।
इस पद्धति से, गौशाला चंदे पर नहीं, स्वावलंबन बनती है।

पंच गव्य की सहायता से असाध्य रोगों की चिकित्सा संभव है।

पंचगव्य विस्तार गुरुकुलम के आने वाले सत्रों की सूचनाएं :

शीतकालीन सत्र

 15 जनवरी 2020 से 20 जनवरी 2020 तक
15 फरवरी 2020 से 20 फरवरी 2020 तक
15 मार्च 2020 से 20 मार्च 2020 तक

Asimit Aayurgavya

gurukulam (Sanskrit: गुरुकुलwas a type of education system in ancient India with shishya ('students' or 'disciples') living near or with the guru, in the same house. The guru-shishya tradition is a sacred one in Hinduism and appears in other religious groups in India, such as Jainism, Buddhism and Sikhism. The word gurukula is a combination of the Sanskrit words guru ('teacher' or 'master') and kula ('family' or 'home'). Before the British rule, they served as South Asia's primary educational system. The term is also used today to refer to residential monasteries or schools operated by modern gurus. The proper plural of the term is gurukulam, though gurukulas and gurukuls are also used in English and some other Western languages.

In a gurukula, the students living together are considered as equals, irrespective of their social standing. They learn from the guru and help the guru in his everyday life, including carrying out of mundane daily household chores. However, some scholars suggest that the activities are not mundane and very essential part of the education to inculcate self-discipline among students. Typically, a guru does not receive or accept any fees from the shishya studying with him as the relationship between a guru and the shishya is considered very sacred.

FEE STRUCTURE

ADPT (MD) PANCHGAVYA 

कोर्स की फीस हेतु जानकारी
कुल फीस :- Rs. 35000/- 
आपका आवेदन करने के लिए :- Rs. 5000/- का ऑनलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करना होगा !

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Bank : kotak mahindra kanchipuram chennai
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